पहेली सी एक लड़की part-2। hindi love story in short

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उस रोज अमावस्या की रात थी। चारो ओर घुप अंधेरा था। पिताजी भी और दिनों के मुकाबले जल्दी सो गए थे।करीब 10:30 बजे होंगे जब पूनम लाइट ऑन ऑफ करके मुझे अपने खिड़की पर बुलाया।”अमन हनुमान टेकरी पे चलोगे” पूनम कुछ फुसफुसाते हुए बोली। मैंने ना समझने की अंदाज में पूनम को इशारा किया।

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“हनुमान टेकरी” पूनम ने हनुमान टेकरी की ओर हाथ दिखाते हुए कहा। पूनम ने पहली बार मुझसे कोई बात की थी वह भी ऐसी बात, ऐसी बात जिसे मैं चाह कर भी नहीं मान सकता था। दिसंबर का महीना अमावस्या की रात नीचे सोए हुए खुफिया पुलिस जैसे पिताजी ऐसे में हनुमान टेकरी जाने की सोचना भी मुमकिन नहीं था।

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“चलो ना प्लीज” पूनम अपनी खिड़की से निकल कर रेलिंग के पास आ गई थी। इतनी रात को हनुमान टेकरी पर क्या करोगी? मैंने पूछा। सुना है रात को हनुमान टेकरी से इंदौर बहोत अच्छा दिखता है मुझे देखना है चलो ना मुझे जाना है अमन अभी जाना है प्लीज चलो। पूनम बच्चों की तरह मचलने लगी, उसका यह बचपना मुझे अंदर तक गुदगुदा रहा था। मैं यह सोचकर हवा में उड़ रहा था कि पूनम मुझे कितने अधिकार से हनुमान टेकड़ी चलने के लिए कह रही है। पता नहीं क्या था उस पल में कि मेरे अंदर से पिताजी का डर निकल गया और मैं झट से रेलिंग फांदकर शर्मा अंकल के छत पर पहुंच गया।

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वहां से पूनम का हाथ पकड़ के सीढ़ियों से होता हुआ सीधा हनुमान टेकरी के रास्ते पर। करीब पूरी रात हम हनुमान टेकरी पर बैठे चमचमाते इंदौर शहर को देखते रहे। दिल में एक डर था पिताजी का समाज का अंधेरे का मगर पूनम के साथ इस तरह खामोशी से दुनिया को देखने का अनुभव भी नया था।

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जब हम घर लौटे तब करीब करीब सुबह हो गई थी। गेट फांद के मैं घर के अंदर घुसा। रात भर से जल रही बाहर की लाइट बंद की और अपने कमरे में जाकर सो गया। सुबह उठा तो पिताजी काफी खुश लग रहे थे।”लगता है रात काफी पढ़ाई की लाइट बहुत देर तक जल रही थी”पिताजी ने मुस्कुराते हुए मुझसे कहा।

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“पिताजी में सिविल का exam नहीं दे रहा मैं आज से अपने दोस्त का बैंड ज्वाइन कर रहा हूं मुझे सिंगर बनना है”मैंने कहा। मेरे इस एलान से पिताजी बहोत नाराज हुए, कुछ दिनों तक घर में स्थाई रूप से तनाव फैला रहा। लेकिन मैंने अपने दोस्त के बैंड में गाना शुरू कर दिया। मैं महीने में तीन चार shows ही कर पता था, पैसे भी ज्यादा नहीं मिल रहे थे लेकिन जो सुकून था वह लाल बत्ती वाली गाड़ी में बैठने से कई ज्यादा था। दो-तीन महीने बीतते बीतते मुझे बाहर से गाने के ऑफर भी आने लगे थे। और उस दिन पहली बार एक सो के ₹10000 मिले थे।

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मैं पूनम को बताने के लिए बेसब्री से रात का इंतजार करने लगा। मेरी पहली बड़ी कमाई पूरे ₹10000। पूनम उम्मीद के मुताबिक खुश हुई फिर नोटों की गड्डी में से हजार हजार के 5 नोट निकाले और बोली ये तुम्हारी गृहस्थी के लिए बाकी तुम रख लो। मैंने पूछा मतलब? “मतलब ए कि जब हम दोनों अपनी गृहस्थी की शुरुआत करेंगे तो उन पैसों की जरूरत पड़ेगी अब से हर महीने कुछ पैसे मेरे पास जमा करते जाओ आगे काम आएंगे”पूनम ने मुस्कुराते हुए कहा। मैं हैरानी से उस लड़की को देखने लगा वो लड़की जो कभी आधी रात को हनुमान टेकरी जाने की सनक पाल लेती हैं और कभी एक साहनी औरत की तरह बर्ताव करने लगती है।

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पूनम मेरे लिए किसी पहेली की तरह थी। जब मुझे लगता मैं उसे समझने लगा हूं वह उतनी ही अजनबी हो जाती। दिन बीत रहे थे मैं धीरे-धरे कामयाबी के ओर बढ़ रहा था। एक दिन मुझे विदेश में स्टेज शो करने का मौका मिला पूरे 7 दिन का यूरोप टूर। अपने पैरों पर खड़ा होना किसे कहते है उस दिन समझा था मैं।

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पापा को भी पहली बार मुझ पर गर्व हो रहा था। अगर शो सफल रहा तो उसी कंपनी के साथ 3 साल का कॉन्ट्रैक्ट, ढेर सारे पैसे, बड़ा घर, अपनी गाड़ी फिर अचानक ध्यान आया पूनम का नाम तो अपने भविष्य की योजनाओं में मैंने शामिल ही नहीं किया। एक पल को मैं शर्मिंदा हुआ।

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फिर लगा पूनम तो मेरी ही है। टूर की तैयारियां, दिन रात का रिहर्सल और वक्त न जाने कहां उड़ जाने लगा। रात को लौटने में देर हो जाती थी। पूनम लाइट जलाए खिड़की पर मेरा इंतजार करती रहती।खामोश इशारों में बातें किए हुए तो न जाने कितने महीने बीत गए थे।

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और मैं तो इस हालत में भी नहीं होता की दो पल खड़े होकर उसका हाल-चाल पूछ लूं। एक दिन मैं रिहर्सल से लौटकर थका हुआ बिस्तर पर लेटा था। तभी पूनम ने बल्ब से फ्लैश चमका के मुझे खिड़की पर आने का इशारा दिया। कुछ झुंझलाता हुआ मैं खिड़की के पास पहुंचा। अपनी आदत से उलट पूनम उस दिन काफी परेशान दिख रही थी।

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पर मेरे थके हुए शरीर को उस वक्त पूनम के परेशानी से ज्यादा अपने नींद की चिंता थी।”अमन तुम मेरे साथ शादी करोगे अभी” पूनम ने पूछा। मैं जैसे नींद से जागा “तुम भी ना कुछ भी बोल देती हो” मैंने हंसते हुए कहा।”मैं serious हूं अमन नीचे मम्मी पापा रवि के साथ मेरी शादी तय कर रहे हैं उनके नजर में रवी मेरे लिए तुमसे अच्छा पति साबित होगा अब मेरे पास भाग के शादी करने की अलावा और कोई ऑप्शन नहीं है” पूनम की बड़ी बड़ी आंखें यह कहते हुए कुछ पानीली हो चली थी।

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कहां मुझे आने वाली टूर की तैयारी करनी थी और कहां पूनम मुझे उसमें और अपने चमचमाते भविष्य में चुनने के लिए कह रही थी।”कैसी चीज लेकर बैठ गई हो यार अभी मुझे यूरोप में स्टेज शो करने का मौका मिला अभी शादी कर लेंगे कि सब चौपट हो जाएगा, अभी सेट्टल भी तो नहीं हुआ हूं तुम समझ रही हो ना” मैंने पूनम के दोनों कंधों को अपने हथेलियों से दबाते हुए कहा। लेकिन आज मैं उससे नजर नहीं मिला पाया था। पूनम की आंखों से एक बूंद गिरी पर दूसरी बूंद गिरने से पहले उसने खुद पर काबू पा लिया।

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उसने मेरी आंखों में आंखें डाली और मजबूत आवाज में बोली बधाई हो चुनाव करना सीख गए हो तुम।best of luck। इसके बाद पूनम मुड़ी और अपने कमरे में जाकर पहले दरवाजा फिर खिड़की फिर लाइट भी बंद कर दी। मैं उसके कमरे में पसरे अंधेरे को खामोश देखता रह गया। यूरोप टूर के बाद मुझे कई प्रोजेक्ट्स मिले ढेर सारा पैसा, मुंबई में अपना फ्लैट बड़ी गाड़ी,सबकुछ। लेकिन कुछ खो जाने का एहसास ताउम्र बना रहा। कुछ महीनों में पता चला की पूनम की शादी रवि से हो गई है। बस इंदौर आने का आखरी बहाना भी खत्म हो गया।

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लेकिन इस बार जब मुझे इंदौर में एक स्टेज शो करने का ऑफर मिला तो मैं ना नहीं कर पाया। शायद एक बार पूनम को देख लेने का लालच रहा होगा। हनुमान मंदिर से आगे बढ़कर राजू की दुकान और दुकान के ठीक सामने मेरा घर, टैक्सी रुकी , मैं उतरा, अपना सूटकेस उतारा और अपनी घर की ओर बढ़ा ही था कि निक्कर और t-shirt पवन एक तूफान मेरे बगल से गुजरा और मेरे पीछे छुप गया। हाथ में खाने की थाली लिए हुए एक दूसरा तूफान मेरे ओर चला रहा था। पूनम मेरी अधूरी ख्वाइश, मेरे दोस्त रवि की पत्नी, मेरे पीछे छुपे 8 साल के उस बच्चे की मां मेरे ठीक समने खड़ी थी।

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मेरे पैर सुन्न पड़ गए, धड़कने तेज हो गई, आंखें पत्थर से बनकर उसको देखने लगी।”मैं कह रही हूं खाना खा ले अम्मु” बस मुझे अपने सामने देखने से पहले इतना ही कह पाई थी वो। वक्त का पहिया जैसे फिर एक बार हम दोनों को उसी मोर पर ले आया था। हमारे बीच के आठ साल चुपके से कहीं खिशक गए। मैंने उसकी आंखों में देखा जैसे पूरा समंदर उन में उतर आया हो। उसने अपनी डबडबाई आंखों को अपनी पलको से छुपाने की कोशिश की पर आंसू की एक जिद्दी बूंद कोरो से झाक ही गई। मैं उसको देखता रहा और उसने अपनी नजरें मेरे चेहरे से हटा ली।

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फिर मेरे पीछे छिपे हुए बच्चे का हाथ पकड़ खींचते हुए अपने घर ले गई। बच्चा अब भी कुनमुना रहा था, खाना खाने से मना कर रहा था। मेरी नजरों से ओझल होने से पहले पूनम ने एकबार फिर मुझे मुड़ मुड़ कर देखा था। मैं काफी देर तक गेट के पास पागलों की तरह खड़ा रहा फ़िर अपने भारी भरकम बैग से भी भारी अपने मन को घसीटते हुए अंदर चला गया। मैंने अपना बैग सोफे के पास छोरा और सीधा अपने कमरे में चला गया। रात हो गई थी और बिस्तर पर लेटा हुआ मैं अपनी तन्हाई को सहला रहा था कि तभी सामने की खिड़की से बिजली का फ्लैश चमका। 8 साल बाद।

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मैं चौंक गया, खिड़की के पास पहुंचा तो देखा कि पूनम उसी खिड़की पे खड़ी लाईट ऑन ऑफ कर रही थी। ठीक वैसे ही जैसे 8 साल पहले किया करती थीं। मुझको देखकर स्वीच से उसका हाथ हट गया। “कैसी हो” मैंने पूछा, “तुम कैसे हो” उसका जवाब आया,”मुझको याद किया” मेरी आंखें भर आई, उसने जवाब नहीं दिया वह कुछ सोच रही थी। मैं उसकी ओर देखता रहा।”हनुमान टेकरी चलोगे” उसने इशारे से पूछा। उसकी ख्वाहिश को टाल सकता था मैं भल्ला, थोड़ी देर में हम लोग हनुमान टेकरी पर बैठे चमचमाते हुए शहर को देख रहे थे। तुम खुश हो? एक लंबी खामोशी के बाद मैंने पूछा।

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हां उसने कहा। तुम्हारा बेटा बहुत प्यारा है क्या नाम है उसका मैंने पूछा।अमन पूनम ने बिना हिचके जवाब दिया। जब अमन पैदा हुआ तो उसके चेहरे में मैं तुम्हारा चेहरा तलाश रही थी। सोचा था कि तुम मिलोगे तो मैं बताऊंगी और किसी को तो बता नहीं सकती थी ना। मैंने कुछ नहीं कहा बस अंधेरे में अपने हाथ से बगल में होगी घास को नोचता रहा। पूनम ने अपने पर्स कुछ पैसे निकाले और मेरे हाथ में रखती हुई बोली। पूरे 16000 है याद है ना तुमने अपनी गृहस्ती शुरू करने के लिए मेरे पास रखी थी। अब वक्त आ गया है शादी कर लो अमन। उसने जैसे मेरी दुखती रक्त हाथ रख दिया था।

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नहीं पूनम मैं अपना प्यार तो नहीं निभा पाया पर अब किसी और से शादी करके उसको धोखा नहीं दे पाऊंगा, मैंने पिघलती हुई आवाज में कहा। पूनम ने मेरा हाथ पकड़ा और उठ खड़ी हुई।”चलो हम दोनों कर लेते हैं शादी”उसने मेरी आंखों में आंखें डालकर कहा।

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मैंने हैरानी से उसकी ओर देखा मगर उसके चेहरे पर मजाक का एक रेशा तक नहीं था। पूनम और मैंने थोड़ी देर सोचा फिर मेरी होठों पर मुस्कुराहट खिल आईं। अब भी बिल्कुल नहीं बदली थी पूनम वही पागलपन वहीं बचपना। नहीं पूनम एक गलती कर चुका हूं एक और नहीं मैंने अपना हाथ उसकी हाथों से धीरे से छुड़ाते हुए कहा।

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जानते हो अमन मैं अपने पति की बहुत इज्जत करती हूं, तुम्हारे साथ भागने का मेरा कोई इरादा भी नहीं था। अब तुम सच में सही चुनाव करना सीख गए हो, अब मुझे तुम्हारी कोई चिंता नहीं, पूनम ने मुस्कुराते हुए कहां और फिर नीचे बैठ गई। मैं कुछ देर पूनम को देखते रहा वो जो शादीशुदा थी वो जो 8 साल के बच्चे की मां थी, वो जो अपने पुराने प्रेमी के साथ आधी रात को सुनसान पहाड़ी पर बैठी हुई थी, वो जो आज भी उतनी ही पवित्र थी जितना 9 साल पहले हुआ करती थी।

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मैं पूनम के बगल में जाकर बैठ गया।”तो कोई लड़की देखो ना मेरे लिए बिल्कुल अपनी जैसी” मैंने शरारत से कहा पूनम भी शरारत से मुस्कुरा दी।

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